मणिपुर में कुकी और मैतेई गुटों में शांति-वार्ता

 


पिछले एक वर्ष से मणिपुर में जारी जातीय हिंसा में 226 लोग मारे जा चुके हैं, 1200 से अधिक घायल हुए और 65000 लोग पलायन कर गए।

इस बीच मंगलवार 15अक्टूबर को नई दिल्ली में कुकी व मैतेई संप्रदाय के प्रतिनिधियों के मध्य हिंसा समाप्त करने और राज्य में शांति स्थापित करने हेतु बैठक हुई।

दोनों तरफ से राज्य के कुछ विधायक व अन्य अधिकारी बैठक में शामिल हुए। इसके अलावा नागा जाति से भी वहां के दो विधायक आए। हालांकि ग्रह मंत्री अमित शाह और मणिपुर के मुख्यमंत्री एन वीरेन सिंह बैठक में नहीं  आए।

झगड़ा क्या है ?

दरअसल मणिपुरकी कुल जनसंख्या 38 लाख है। यहां मैतेई, कुकी और नागा लोग रहते हैं। मैतेई हिंदू और कुकी,नागा ईसाई धर्म को मानते हैं। कुकी और नागा को ST का दर्जा मिला है।

 मैतेई हिंदू भी ST वर्ग में शामिल करने के लिए मांग कर रहे हैं। वैसे घाटी में मैतेई लोगों की आबादी 50%है।लेकिन उनका कहना है कि हम यहां के मूल निवासी हैं।  1948 में मणिपुर का भारत में विलय होते समय मैतेई को ST का दर्जा प्राप्त था।उनके राजाओं ने कुकी को म्यांमार  से यहां युद्ध में सहायता यहां बुलाया था। वे अब यहां के स्थाई निवासी हो गए और सारे जंगल काट कर अफीम की खेती करने लगे जिससे मणिपुर ड्रग व्यापार का बड़ा केंद्र बन गया है। मैतेई समुदाय ने हाईकोर्ट में ST दर्जे के लिए याचिका लगाई।उसके बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की सहमति से मैतेई को ST दर्जा देने के निर्देश दिए।

कुकी इसका विरोध कर रहे हैं। 



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