इसराइल और ईरान में युद्ध क्यों हो रहा है ?

 


इसराइल और ईरान में युद्ध छिड़ने की वजह क्या है ? आपको इस सवाल का जवाब इस पोस्ट में मिलेगा।

14मई 1948 को फिलिस्तीन से अलग हो कर इसराइल एक स्वतंत्र यहूदी देश बना। तब ईरान और इसराइल अच्छे दोस्त थे। ईरान के शाह रजा पहलवी ने सबसे पहले इसराइल को एक देश को मान्यता दी।

 उस समय दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध अपने उच्च स्तर पर थे।

लेकिन 1960 के बाद ईरान में वहां के धार्मिक नेता अय्यतुल्लाह रुहुल्लाह खुमैनी ईरान को मुस्लिम राष्ट्र घोषित करने की मांग करने लगे।शाह पहलवी इसके पक्ष में नहीं थे।

यहां तक कि 1964 में शाह ने खुमैनी को देश निकाला दे दिया।

तब खुमैनी इराक में जाकर वहां ईरान को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास करते रहे। वे इसराइल और अमेरिका के विरुद्ध भी प्रचार करने में लगे रहे। 

ईरान की जनता धीरे-धीरे खुमैनी का समर्थन करने लगी। 1974 में शाह पहलवी को सत्ता से हटा दिया गया उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा।

ईरान एक शिया इस्लामिक राष्ट्र बन गया।

ईरान ने यहूदी राष्ट्र इसराइल से सारे संबंध समाप्त कर दिए और दोनों के मध्य हवाई-मार्ग भी बंद कर दिया।

ईरान पूरे क्षेत्र में एक इस्लामिक राष्ट्र के रूप में अपना सिक्का जमाना चाहता था इसलिए उसने आसपास के छोटे देशों में सक्रिय उग्रवादी संगठनों की मदद लेना शुरू की। लेबनान में हिजबुल्ला, यमन में हुती, फिलिस्तीन की गाजा पट्टी में हमास ये सभी शिया उग्रवादी संगठन थे। इसके अलावा ईरान ने सीरिया और इराक को भी अपनी तरफ कर लिया।

ईरान ने इसराइल के आसपास इन संगठनों की आर्म्ड फोर्सेज तैनात कर दी। उस पर हिजबुल्ला और हमास के माध्यम से इसराइल पर हमले करवाने के आरोप भी लगे।

इसराइल ने भी 2010 में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया और कई ईरानी वैज्ञानिकों को मार डाला। तब से निरंतर दोनो देशों के बीच अक्सर कई बार झड़प होती रही।

लेकिन पिछले साल 7अक्टूबर को हमास ने इसराइल में घुसकर हजारों बेगुनाहों को मार डाला और कई को बंधक बना लिया।

इसराइल ने गाजा पर हमला कर दिया। इस तरह एक साल पहले दोनों देशों के बीच खुले युद्ध का आरंभ हो गया।

ईरान लेबनान के हिजबुल्ला और गाजा के हमास के द्वारा इसराइल पर राकेट, मोर्टार और मिसाइलों के हमले करने लगा। 

इसराइल ने हिजबुल्ला ग्रुप को खत्म करने हेतु उसके ठिकानों पर पिछले एक साल में कई मिसाइल हमले किए जिसमें हिजबुल्ला के  बहुत से बड़े नेता मारे गए। दोनों देश के दूसरे के आक्रमण का जवाब आक्रमण से देते जा रहे है। इसमें अमेरिका खुले तौर पर इसराइल का साथ दे रहा है। वह  इसराइल को हथियार बेच कर तगड़ी कमाई भी कर रहा है और उसका मित्र-राष्ट्र भी बना बैठा है।

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